आज हम सभी जाने-अनजाने में एक 'जुलूस की भीड़' का हिस्सा बनते जा रहे हैं लोग बदलते जा रहे हैं और कई बार उस भीड़ का नायक भी लेकिन जुलूस ज्यों का त्यों आगे बढ़ रहा है इस कथा संकलन में कहानियों के विषयों में काफी विविधता है इनके नायक 'सुपरमैन' न होकर एक आम जन है जो आप और हममें से कोई एक है घटनाएं और परिस्थितियाँ बिल्कुल परिचित हैं जिसका आज का मध्यम और गरीब तबका रोज सामना कर रहा है उम्मीद है कि प्रत्येक पाठक किसी न किसी कहानी के चरित्र में अपने आप को पाएगा
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