वर्तमान समय में जब दुनिया तानाशाही के भंवर में उलझती दिख रही है, तब मानवता के मसीहा महात्मा गांधी सहसा हमारी स्मृतियों में एक प्रकाश पुंज की भाँति आ जाते हैं। सत्य के साथ साहस व अहिंसा के साथ उनकी अनंत यात्रा व्यक्ति को अनायास अपनी ओर आकर्िृात करती है। जैसे‐जैसे हम गांधीजी को समझने का प्रयास करते हैं, वैसे‐वैसे वे हमारी आंतरिक संवेदना को कुरेदते जाते हैं। उन गुत्थियों को हम बार‐बार समझने का प्रयास करते हैं, जो तात्कालिक संघृाोर्ं में दिखाई देती थीं और वर्तमान में भी वे अनसुलझाी सी प्रतीत होती हैं। हम पर जो ऋण है, उन गुत्थियों को सुलझा कर ही उतारा जा सकता है।
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