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आज; कल का अर्ध विराम। जना इंसान; संतोषजनक एक पूर्ण विराम की लालसा से ज़िंदा। "अर्ध विराम" मेरा तीसरा संग्रह; मेरी आज की सोच का सार। एक सोच जो सालों के अध्यन, मनन और अनुभवों का निचोड़ है।
शब्दों के माध्यम से इस संग्रह में प्रस्तुत मेरा आज तक का सच।
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हिन्दी लेखक अनुज कुमार मूल रूप से दिल्ली के हैं और इस वक़्त इंग्लैंड में रह रहे हैं. दिल्ली में ही अनुज कुमार की स्कूलिंग हुई, बाद में उच्चशिक्षा दिल्ली विश्वविद्यालय से अंग्रेज़ी साहित्य में हुई थी। उसके बाद भारतीय जन संचार संस्थान, दिल्ली (IIMC) से एडवरटाइजिंग की शिक्षा हासिल की और अंततः इंग्लैंड से इन्होंने मार्केटिंग में मास्टर्ज़ की…mehr

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Produktbeschreibung
आज; कल का अर्ध विराम। जना इंसान; संतोषजनक एक पूर्ण विराम की लालसा से ज़िंदा। "अर्ध विराम" मेरा तीसरा संग्रह; मेरी आज की सोच का सार। एक सोच जो सालों के अध्यन, मनन और अनुभवों का निचोड़ है।

शब्दों के माध्यम से इस संग्रह में प्रस्तुत मेरा आज तक का सच।

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हिन्दी लेखक अनुज कुमार मूल रूप से दिल्ली के हैं और इस वक़्त इंग्लैंड में रह रहे हैं. दिल्ली में ही अनुज कुमार की स्कूलिंग हुई, बाद में उच्चशिक्षा दिल्ली विश्वविद्यालय से अंग्रेज़ी साहित्य में हुई थी। उसके बाद भारतीय जन संचार संस्थान, दिल्ली (IIMC) से एडवरटाइजिंग की शिक्षा हासिल की और अंततः इंग्लैंड से इन्होंने मार्केटिंग में मास्टर्ज़ की डिग्री प्राप्त की। अनुज जी २० साल से इंग्लंड मैं ही हैं। अनुज कुमार हिंदी और अंग्रेज़ी साहित्य के बेहद शौक़ीन हैं। कविताओं के साथ-साथ ख़ूबसूरत चित्रकारी भी करते हैं।


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